Life Shayari In Hindi expresses true feelings of life in very simple words. This collection is for readers who love 2 line emotional shayari in hindi on life and want to feel deep meaning in short lines. Here you will find top life shayari in two lines Hindi that talk about life happiness pain hope and reality.
Many shayari share short enjoy short life thoughts and help readers live each moment happily. Some lines talk about love life and trust like life partner shayari in hindi, while others show deep sadness and feelings of loneliness through life struggle shayari words. You can also feel sweet and emotional memories in college or school life poetry. Life Shayari In Hindi connects the heart with real life emotions.
Heart Touching Life Shayari in Hindi
अपना जीना एक धोखा अपना मरना इक फ़रेब
ज़िंदगी से ज़िंदगी की तरजुमानी हो तो क्या
कुछ तो महफ़ूज़ रखिए सीने में
ज़िंदगानी खुली किताब न हो
बढ़ता जाता है तूल गेसू-ए-यार
घटती जाती है ज़िंदगी दिल की
ज़िंदगी का हर इक ग़म उठाते हुए
मैं संभलने लगा लड़खड़ाते हुए
कौन सा सौ बरस जियूँगा मैं
मुझ पे उसका जुनून रहने दे
ज़िंदगानी असीर करने को
गेसुओं का ये जाल अच्छा है
वो जिसने छीन ली है ज़िंदगानी
मताए-ज़िंदगानी भी वही है
ज़िंदगी एक रेत की दीवार
बच के साए से भी निकल
मिले क़तरा क़तरा ये क्या ज़िंदगी है
ऐ दरियाए रहमत वही तिश्नगी है
ज़िंदगी धूप में आने से खुली
साया दीवार उठाने से खुला
ख़ार-ए-उल्फ़त की बात जाने दो
ज़िंदगी किस को साज़गार आई
हयात लाख हो फ़ानी मगर ये सुन रखिए
हयात से जो है मक़सूद ग़ैर फ़ानी है
हम कैसे ज़िंदा हैं अब तक
हम को भी हैरत होती है
बे-दिली क्या यूँ ही दिन गुज़र जाएँगे
सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
ज़िंदगी मह्व-ए-ख़ुद-आराई थी
आँख उठा कर भी न देखा हमने
बचाएँ आबरू जिस्मों की भीड़ में कैसे
है खोलनी गिरह-ए-जाँ मगर कहाँ खोलें
आँख से किस ने रोशनी माँगी
ख़्वाब के नाम ज़िंदगी माँगी
कितना सोचा था दिल लगाएँगे
सोचते सोचते हयात हुई
उन से शर्र कुछ ऐसे बिछड़े
जीवन का हर सपना बिखरा
सुर्ख़ियों में ऐब सारे हाशिए में नेकियाँ
क्या किताब-ए-ज़िंदगी है ज़िंदगी की आड़ में
2 Line Shayari in Hindi on Life
सर्द हो सकता नहीं सरगर्म इंसां का लहू
हादिसात-ए-नौ-ब-नौ में ज़िंदगानी हो तो क्या
शायर अजीब रंग से गुज़री है अपनी उम्र
दुनिया में नाम भी न सुना ख़ैर-ख़्वाह का
वक़्त से पहले मौत अच्छी नहीं
ज़िंदगी सामने पड़ी है अभी
ज़ीस्त में जब नहीं आती किसी उनवान पे हँसी
आप अपने दिल-ए-नाकाम पे हँस देता हूँ
नहीं है कोई हमें ज़िंदगी का शौक़ मगर
हम अपनी जान से जाएँ तो जाएँ किस के लिए
रोज़ जीते हैं रोज़ मरते हैं
किस क़दर सख़्त-जान हैं हम लोग
हमारा मक़सद-ए-अव्वल है जज़्ब-ए-शौक़-ओ-सरमस्ती
यही वो ज़िंदगी है जिस को हम कामिल समझते हैं
न चारागर के लिए मुझ में कोई वस्फ़-ए-हयात
न वजह-ए-मातम-ए-मर्ग आह-ओ-नौहा-गर के लिए
वो ज़िंदगी है मोहब्बत कि जिस के ज़ेर-ए-असर
नफ़स नफ़स में हो इक मौत उम्र भर के लिए
छेड़िए साज़-ए-ज़िंदगी नग़्मा-नवाज़ हो न हो
आह तो कर के देखिए सोज़ में साज़ हो न हो
ऐ ज़ुल्फ़ ख़म-ब-ख़म तुझे अपना ही वास्ता
हमवार होने पाए न उम्र-ए-रवाँ की राह
जनम जनम के सातों दुख हैं इसके माथे पर तहरीर
अपना आप मिटाना होगा ये तहरीर मिटाने में
ख़ुदकुशी का फ़ैसला ये सोच कर हमने किया
कौन करता ज़िंदगी का मौत से अच्छा इलाज
ज़िंदगी नाम उसी मौज-ए-मय-ए-नाब का है
मयकदे से जो उठे दार-ओ-रसन तक पहुँचे
तंदी-ए-सैल-ए-वक़्त में ये भी है कोई ज़िंदगी
सुबह हुई तो जी उठे रात हुई तो मर गए
हर नफ़स मंत-कश-ए-आलाम है
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है
तजदीद-ए-ज़िंदगी के इशारे हुए तो हैं
कुछ पल सही वो आज हमारे हुए तो हैं
ज़ख़्म-ए-फ़ुरक़त को पलकों से सीते हुए
साँस लेने की आदत में जीते हुए
Sad Shayari in Hindi for Life
अब भी ज़िंदा हो तुम ज़िंदगी ने कहा
ज़िंदगी के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
किसी के बिन किसी की याद के बिन
जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो
वही है ज़िंदगी लेकिन ये हाल है अपना
कि जैसे ज़िंदगी से ज़िंदगी कम होती जाती है
अज़ाब-ए-ज़िंदगी आख़िर अज़ाब-ए-आख़िरत निकला
हज़ारों बार मर मर के यहाँ जीना पड़ा मुझ को
सदियों से मैं जीने की सज़ा काट रहा हूँ
साँसों की सलीबों पे हूँ लटकाया हुआ सा
इस को धुँधला न सकेगा कभी लम्हों का ग़ुबार
मेरी हस्ती का वरक़ यूँ ही खुला रहने दे
नहीं कि ज़िंदगी हमें कहाँ कहाँ लिए फिरी
है यूँ कि हम गए उसे कहाँ कहाँ लिए हुए
इस ज़ाविए से देखिए आईना-ए-हयात
जिस ज़ाविए से मैंने लगाया है धूप में
रोज़-ओ-शब हयात के ख़ानों में बाँट कर
क़िस्तों में ख़ुदकुशी के वसाइल हुए हैं लोग
शाम मिम्बर पे फ़ज़ीलत के बहुत संजीदा
सुबह दम अफ़सुर्दगी के फ़र्श पे बिखरा हुआ मैं
ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
ज़िंदगी इक हसीन संगम है
आख़िर इक रोज़ तो पैवंद-ए-ज़मीं होना है
जामा-ए-ज़ीस्त नया और पुराना कैसा
हयात आज भी कनीज़ है हुज़ूर-ए-जबर में
जो ज़िंदगी को जीत ले वही ज़िंदगी का मर्द है
हर एक काम है धोखा हर एक काम है खेल
कि ज़िंदगी में तमाशा बहुत ज़रूरी है
विदा करती है रोज़ाना ज़िंदगी मुझ को
मैं रोज़ मौत के मंझधार से निकलता हूँ
Happy Life Shayari in Hindi
हमारे होंठों पर बिखरे हंसी के रंग,
हर पल ज़िंदगी बन गई खुशियों के संग।
आँखों ने इतनी मीठी बातें कीं,
हर लम्हा हमारी ज़िंदगी में मिठास बनी।
तेरी सादगी पर हंसी आती है,
तेरे आने से दिल में खुशी छा जाती है।
जैसे बुलबुल़ को चाहिए बस बहार,
वैसे ही तेरी मौजूदगी है हमारी खुशियों का आधार।
आवाज़ है या खामोशी, हर लम्हा है खास,
ग़म और खुशी की परिभाषा हो जैसे पास।
वो दिल ले गए खुशियाँ हमारी,
पास रहकर भी दूरियों का एहसास हमारी।
सिर्फ़ खुशियाँ नहीं, ग़म भी है इस संगम में,
ज़िंदगी एक हसीन संगम है हर रंग में।
कभी खुशियों की दौलत मिली, कभी ख्वाबों में खोई,
ज़िंदगी हर पल हमें कुछ न कुछ सीखा गई।
हर पल दोस्तों के साथ बिताए,
छोटी-छोटी बातों में जी लें खुशियों के साए।
मैं खुश हूँ, उसके दिल का मेहमान हूँ,
उसकी सुबह और शाम में बस मैं हूँ।
जीने के लिए याद ही काफी है,
खुश रहने के लिए बस उसकी चाह काफी है।
खुशियाँ देने आए थे, पर नम आंखें छोड़ गए,
हम तो पहले से ही ग़म में थे, और और परेशान कर गए।
खुशी का वह समय, जब सब कुछ सही था,
दोस्तों के बीच, हर पल हँसी और मज़ा था।
तुम्हारी याद ही मेरे जीने की प्यास है,
तेरी हँसी ही मेरी खुशियों की आस है।
शबनम की ताजगी से खिलता कोई गुलाब,
रातों में सजते सपनों का अद्भुत आब।
खुशियों के पहलू में मज़ा है कहीं,
इंतज़ार में जो मज़ा है वो यार में कहीं।
जगा हैं दिल में कई अरमान अभी,
ख़ुशी से सरशार मेरा दिल अभी।
मैं खुश हूँ उसे देखकर,
मर मर के जी रहा हूँ प्यार में बस उसी को देखकर।
काश खुशियों की कोई दुकान होती,
हम भी उसकी हर खुशी खरीद पाते।
Emotional Shayari in Hindi on Life
हम लोग तो मरते रहे क़िस्तों में हमेशा
फिर भी हमें जीने का हुनर क्यों नहीं आया
ख़ाक और ख़ून से इक शम्अ जलाई है
मौत से हम ने भी सीखी है हयात-आराई
सारी रुसवाई ज़माने की गवारा कर के
ज़िंदगी जीते हैं कुछ लोग ख़सारा कर के
तेज़ हवा ने मुझ से पूछा
रेत पे क्या लिखते रहते हो
मेरा तजुर्बा है कि इस ज़िंदगी में
परेशानियाँ ही परेशानियाँ हैं
अजब तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी हम ने
जहाँ में रह के न कार-ए-जहाँ को पहचाना
ख़ुदा आबाद रखे ज़िंदगी को
हमारी ख़ामोशी को सह गई है
इन पे क़ुर्बान हर ख़ुशी कर दी
ज़िंदगी नज़्र-ए-ज़िंदगी कर दी
कहीं कोई कमाँ ताने हुए है
कबूतर आड़े तिरछे उड़ रहे हैं
जब नहीं कुछ ऐतिबार-ए-ज़िंदगी
इस जहाँ का शाद क्या नाशाद क्या
किस ख़राबी से ज़िंदगी फ़ानी
इस जहाँ-ए-ख़राब में गुज़री
ज़िंदगी वादी-ओ-सहरा का सफ़र है क्यों है
इतनी वीरान मेरी राहगुज़र है क्यों है
धूप की सख़्ती तो थी लेकिन
ज़िंदगी में फिर भी था साया बहुत
इक घड़ी ज़िंदगी में आती है
मौत का इंतज़ार होता है
हर नफ़स इक शराब का हो घूँट
ज़िंदगानी हराम है वरना
आँखों में उस की मैंने आख़िर मलाल देखा
किन किन बुलंदियों पर अपना ज़वाल देखा
नहीं है ज़िंदगी यूँ तुझ से कोई वास्ता लेकिन
तलाशेगी तो मिल जाऊँगा तेरी हर कहानी में
वो कूदते उछलते रंगीन पैरहन थे
मासूम क़हक़हों में उड़ता गुलाल देखा
ज़िंदगी अब तुझे सँवारें क्या
कोशिशें सारी बे-असर शायद
ज़िंदगी बस मुस्कुरा के रह गई
क्यों हमें नाहक़ रिझा के रह गई
Single Life Shayari in Hindi
अकेला रहना बेहतर है
जब साथ कोई दिल से न लगे।
तन्हाई ने जब दिल को समझाया
खुशी अपने आप मिलने लगी।
अकेला दिल भी कभी-कभी
दुनिया से ज्यादा रोशन लगता है।
खुद से बातें करना भी
एक सुंदर बातचीत है।
जब खुद को पहचाना अकेले में
ज़िंदगी ने मुस्कुराना सिखाया।
रिश्तों की भीड़ में भी
अकेलेपन ने सुकून दिया मुझे।
लोग साथ छोड़ गए
पर मैंने खुद को कभी नहीं छोड़ा।
तन्हाई के हर पल में
एक नई रोशनी बस गई।
अकेला चलना आसान नहीं
पर मजबूत बनाता है।
किसी की याद में नहीं रुका
यह दिल अपने सफर पर आज़ाद है।
दोस्तों की हँसी दूर थी
पर दिल की आवाज़ करीब थी।
अकेले रहकर भी कभी
खुद से ज्यादा प्यार हुआ।
जहाँ सब चले जाते हैं
मैं अपने साथ रहता हूँ।
अकेलेपन में जो सुकून है
वो सबकी आवाज़ों में नहीं।
तन्हाई भी कभी-कभी
सबसे खूबसूरत हमसफ़र बन जाती है।
Missing School Life Shayari
स्कूल की वह सुबहें, जब देर से भी पहुंचते थे
दोस्तों की हँसी हमें स्वर्ग जैसी लगती थी।
क्लासरूम की दीवारें भी आज याद आती हैं
जहाँ हर समस्या दोस्तों से हल होती थी।
खेल के मैदान में दौड़ना, हँसना और गिरना
ये पल दिल से कभी नहीं जाते।
टीचर की वह सीख, कभी सख्त, कभी प्यार भरी
अब याद आकर मुस्कान ले आती है।
होमवर्क के बहाने छुट्टियाँ मनाना
कितनी मासूम खुशियाँ थीं वो!
कॉलेज की लाइब्रेरी, खामोशियों में बातें
किताबों के साथ भी दोस्तों की बातें याद आती हैं।
वह ग्रुप प्रोजेक्ट्स और रातें जागना
क्या मज़ा आता था उन लम्हों में!
कैम्पस के रास्ते, छोटे छोटे कैफे
अब दिल को तड़पाते हैं याद करके।
बस स्टॉप पर इंतजार करते हुए बातें करना
कुछ पलों की खुशी और उम्र भर की यादें दे गया।
स्टेशनरी की दुकान पर छोटे छोटे झगड़े
कितने मज़ेदार थे वो लम्हे।
कॉलेज की महफिलें, फेस्टिवल की रौनक
हर रंग आज भी दिल को छू जाता है।
क्लास में चुपके से कुछ लिखना और मुस्कुराना
ये छोटी छोटी शरारतें दिल को भाती हैं।
एग्ज़ाम के दिन की घबराहट
और दोस्तों के साथ हँसना, सब याद आता है।
स्कूल बस की वह हर सुबह की हलचल
अब दिल को मीठा सा दुख देती है।
गर्मियों की छुट्टियाँ, खेल का शोर
ये सब पल आज भी दिल में बसे हैं।
One Line Shayari in Hindi on Life
- ज़िन्दगी अक्सर खामोश दर्द में छिपी रहती है।
- हर खुशी के पीछे छिपे हुए आँसू भी ज़िन्दगी का हिस्सा हैं।
- वक़्त गुजरता है मगर दिल के ज़ख्म कभी भर नहीं पाते।
- ज़िन्दगी ने हमें ख्वाब तो दिए मगर तअबीर नहीं दी।
- कभी कभी दिल की तन्हाई ज्यादा बोलती है।
- ज़िन्दगी के रास्ते अक्सर अकेले ही तय करने पड़ते हैं।
- हर खुशी के बाद एक उदासी की छाया छा जाती है।
- यादें दिल को चीर कर भी हमें मुस्करा देती हैं।
- ज़िन्दगी की कीमत अक्सर दर्द से ही समझी जाती है।
- लोग जाते हैं, पर उनकी यादें हमेशा रह जाती हैं।
- दिल टूटने के बाद भी ज़िन्दगी चलती रहती है।
- ज़िन्दगी की राहों में अक्सर उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं।
- हर मुस्कान के पीछे छिपी एक खामोश कहानी होती है।
- वक़्त की धूप में दिल के ज़ख्म और भी गहरे हो जाते हैं।
- ज़िन्दगी कभी कभी बेवफ़ा का सौदा भी सिखा देती है।
- हर मोहब्बत का सफ़र दर्द के बिना मुक़म्मल नहीं होता।
- दिल का सुकून अक्सर ज़िन्दगी की हलचल में खो जाता है।
- ज़िन्दगी के कुछ लम्हे आँसुओं की गहराई में डूबे रहते हैं।
- हर दिन नए सवाल लेकर आता है, जवाब नहीं।
- ज़िन्दगी की तीक़्ष्णता कभी कभी सबसे ज्यादा करीब से लगती है।
Gulzar Shayari on Life in Hindi
आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतज़ार दिखे
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है
कितनी लंबी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने एतिबार किया
जिस की आँखों में कट गई थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतज़ार किया
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई
अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है
रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले
क़रार दे के तेरे दर से बे-क़रार चले
देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई
ये शुक्र है कि मेरे पास तेरा ग़म तो रहा
वगरना ज़िंदगी भर को रुला दिया होता
भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में
उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं
4 Line Shayari on Life
दिन-रात कदे में बीतती रही ज़िंदगी
वो बेख़ुदी के ज़माने कहाँ चले गए
कितनी खुशियों से गुज़रती ज़िंदगी रब
अगर ग़म भी सहा जा सकता होता तो
फरदौस-ए-ख़ो गया हासिल नहीं हो सकता जीवन
मौत ही आती है मंज़िल दिखाने के लिए
बसात-ए-ज़िंदगी पर बाकी है एक चाल मौत की
सदियों से दिन और रात किस ओर उड़ते रहे
चार दिन की बात कहते हैं लोग ज़िंदगी को
पर हमेशा रहने वाली है सिर्फ़ ईश्वर की सत्ता
दर्द बढ़े और दवा न बने
ज़िंदगी बेरंग और बेजान न हो जाए
जरूरतों की दुनिया में ज़िंदगी
ग़मों में ही गिनी जाती है
दिल वालों के लिए संदेश बनकर रह गई
ज़िंदगी अब मजबूरी बनकर रह गई
इंसान से ज़िंदगी अक्सर रूठी रही
और इंसान भी निराश रहा
हर पल खेला समय के साथ
ज़िंदगी एक अजीब पहेली है
बख़्शी गई दौलत भी ज़िंदगी छीन लेती है
सिवाय ख्वाबों के हमें कुछ दिया ही क्या
किराए की खुशियों जैसी ज़िंदगी
मैं सूखते तालाब का पानी हूँ
परछाइयों के बीच ज़िंदगी आई
हर मंज़िल आख़िरी नहीं होती
ज़िंदगी भी है एक मिज़ाल समंदर की
रास्ते के लिए लहरों की मिसाल
ज़िंदगी की धारा में ताक़त है
क्या पानी का बहाव रुक जाएगा
हर कदम पर रखी है ज़िंदगी की इज्ज़त
खुशी और ग़म दोनों का सम्मान किया
काफ़ी करीब रही ज़िंदगी हमसे
पर भरोसा किसी पर कुछ भी नहीं
कभी खुलती, कभी ज़ुल्फ़ें बिखराती
शाम है और शाम ढल रही है
हमसे क्या चाहती है यह ज़िंदगी
क्या चाहती है जान हमसे
मौत से पहले कुछ सांसों का दर्द
जो कर्ज़ था ज़िंदगी का चुका दिया हमने
Conclusion
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